Motivational Story in Hindi – 3 Motivation Kahani Hindi

Motivation Kahani Hindi

ये Motivation Kahani Hindi आपको मोटीवेट के साथ बोहत कुछ सिख भी देगी।

ये रहे कुछ Motivation Kahani Hindi

1. मूर्ख कछुआ

बहुत समय पहले की बात है । एक कछुआ था, जो किसी गांव में एक तालाब में रहता था । उसकी दोस्ती दो बगुलों से थी। तीनों दोस्त एक साथ खूब मज़ा किया करते थे ।

एक बार उनके गांव में बारिश नहीं हुई, जिस कारण वहां भयंकर सूखा पड़ा । नदी व तालाब सूखने लगे, खेत मुरझा गये। आदमी व पशु-पक्षी सब प्यास से मरने लगे ।

वह सब अपनी जान बचाने के लिये गावं छोड़कर दूसरे स्थानों पर जाने लगे । बगुलों ने भी अन्य पक्षियों के साथ दूसरे जगह जाने का फैसला लिया । जाने से पूर्व वह अपने मित्र कछुए से मिलने गये ।

उनके जाने की बात सुनकर कछुए ने उनसे उसे भी अपने साथ ले चलने के लिए कहा। इस पर बगुलों ने कहा कि वह भी उसे वहां छोड़कर नहीं जाना चहाते, परन्तु मुशकिल यह है कि कछुआ उड़ नहीं सकता और वह उड़ कर कहीं भी जा सकते है ।

उनकी बात सुनकर कछुआ बोला, कि यह सच है कि वह उड़ नहीं सकता । परन्तु उसके पास इस समस्या का हल है। कछुए की बात सुनकर बगुलों ने उससे तरीका पूछा ।

कछुआ बोला, ” तुम एक मज़बूत ब़डी ले आओ । उस ब़डी के दोनो कोनों को तुम अपनी-अपनी चोंच से पकड़ लेना और मैं उस ब़डी को बीच में से पकड़कर लटक जाऊंगा। इस प्रकार मैं भी तुम्हारे साथ जा सकूँगा और हम अपनी जान बचा सकेंगे ।”

2. समस्याओं से कैसे लड़ें?

शादी के बाद बेटी घर लौटी। पिता से शिकायतें करने लगीं। बोली- वह जीवन के इस संघर्ष को सहन नहीं कर पाएगी। पिता शांत भाव से सुन रहे थे। पिता पेशे से रसोइए थे।

वे बेटी को रसोई में ले आए। और पानी से भरे 3 बर्तनों को तेज आंच पर रख दिया। जब तीनों बर्तन में पानी उबलने लगा तो उन्होंने एक बर्तन में आलू, दूसरे में अंडे और तीसरे में कॉफी बीन्स डाल दीं।

बिना कोई शब्द कहे, वे चुपचाप बेटी को सुन रहे थे। बेटी नाराज़ थी। समझ नहीं पा रही थी कि पिता आखिर कर क्या रहे हैं? वह अपनी शिकायतें सुना रही है और वे चुप हैं। बीस मिनट बाद पिता ने सारे बर्नर ऑफ कर दिए। आलू, अंडे और कॉफी को बाहर निकाला और एक कप में रख दिया।

नाराज़ बेटी की ओर मुड़कर पूछा- तुम्हे क्या दिखाई दे रहा है? बेटी तुनककर बोली- आलू, अंडे और कॉफी…. और क्या ? पिता ने समझाया- देखो, आलू जो पहले इतना सख्त दिख रहा था, उबलते पानी में वह कितना कमज़ोर हो गया है।

अंडा जब तक संभव था, बाहरी आवरण से भीतरी भाग की रक्षा करता रहा, तब तक वह अंदर से भी सख्त हो गया। और कॉफी को देखो… उसने तो उबलते पानी को ही बदल दिया।

पिता बोले- मान लो… तुम्हारी समस्याएं उबलता पानी हैं, अब तुम्हें तय करना है- तुम्हारा व्यवहार कैसा होगा – आलू जैसा… या कॉफी जैसा।

सीख - आप समस्याओं के प्रति कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, यही मायने रखता है।

3. किस्मत या मेहनत ?

बहुत से लोग असफ़ल होने या हार जाने पर अपनी किस्मत को कोसते हैं और जब अपने आस-पास सफल लोगों से मिलते हैं तो अक्सर यही सोचते हैं कि इनकी किस्मत बड़ी अच्छी है जो ये लोग अपनी फील्ड में एक कामयाब इंसान हैं।

लेकिन क्या यही वास्तविकता है ? । दरअसल, सिर्फ भाग्यवादी लोग ही अपनी किस्मत की दुहाई देते हैं। जब हम अपने जीवन में किसी लक्ष्य को पाने के लिए कठोर श्रम करते हैं तो हमारे विचार तो पॉज़िटिव बनते ही हैं हमारे सारे कर्म और प्रयास भी पॉज़िटिव होने लगते हैं।

ऐसे में, चाहे हमारे जीवन में कितने ही संकट आयें हम उनसे घबराये बिना लगातार अपना कठोर परिश्रम जारी रखते हैं और जिसके फलस्वरूप हम अपने करियर गोल्स या अन्य लक्ष्य पाने में कामयाब हो जाते हैं और तब हमारी किस्मत भी हमारा साथ देती है।

इसलिए, अब जब कभी आप किसी कामयाब इंसान से मिलें तो यह जरुर ध्यान रखना कि इस इंसान ने खूब मेहनत करके सफलता हासिल की है और फिर इसकी किस्मत ने इसका साथ दिया है।

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